एलएनजेपी अस्पताल ने डॉक्टरों से कहा- होटल छोड़ें या ख़ुद ख़र्च उठाएं

एलएनजेपी अस्पताल ने डॉक्टरों से कहा- होटल छोड़ें या ख़ुद ख़र्च उठाएं

दिल्ली सरकार द्वारा कोविड-19 अस्पतालों में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को परिजनों में कोरोना संक्रमण फैलने के डर से होटल और धर्मशालाओं में क्वारंटीन के लिए रखा गया था. पिछले हफ़्ते आरएमएल अस्पताल के डॉक्टरों को फौरन होटल खाली करने का आदेश मिला था और ऐसा न करने पर वेतन कटौती की बात कही गई थी.

(फोटो: पीटीआई)

देशभर में चिकित्सकों और अस्पताल के स्टाफ में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के मद्देनजर बीते महीने दिल्ली सरकार ने कोविड-19 का इलाज कर रहे अस्पतालों के कर्मचारियों को होटल और धर्मशालाओं में ठहराने की सुविधा मुहैया करवाई थी.

इस बीच गुरुवार को लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल के स्टाफ को इन्हें छोड़ने का आदेश मिला है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को मेडिकल डायरेक्टर की ओर से भेजे गए इस आदेश में कहा गया है कि अगर वे (स्टाफ) इससे आगे होटल/धर्मशाला में रहते हैं, तो उन्हें इसका खर्च खुद उठाना होगा.

आदेश में लिखा है, ‘सभी श्रेणियों के स्टाफ, जिन्हेंअस्पताल की ओर से होटल या धर्मशालाओं में क्वारंटीन किया गया है, उन्हें गुरुवार दोपहर 12 बजे तक इसे खाली करना है. इसके बाद हुए खर्च को अस्पताल द्वारा नहीं, बल्कि वहां रहने वाले द्वारा वहन किया जाएगा.’

इस अस्पताल के डॉक्टरों को द ललित होटल में रखा गया है, वहीं स्टाफ के अन्य सदस्य कुछ धर्मशालाओं में हैं. कोविड वॉर्ड में इनकी ड्यूटी के बाद खासतौर पर उनके परिवार को संक्रमण से बचाने के लिए उन्हें दो हफ्तों के लिए क्वारंटीन किया गया था.

ज्ञात हो कि बीते 15 मई को केंद्र द्वारा कोविड डॉक्टरों के क्वारंटीन से जुड़े जारी नए दिशानिर्देश जारी किए गए थे, जिनके मुताबिक चौदह दिन का क्वारंटीन पूरा करने वाले डॉक्टरों को ड्यूटी पर लौटना होगा. केंद्र ने यह भी कहा था कि कोविड-19 की नियमित ड्यूटी करने वाले डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी क्वारंटीन पर नहीं जाएंगे.

केवल वे कर्मचारी, जो सैंपल आदि लेने वाले या कोविड-19 के मरीजों को देखने वाले डॉक्टर हैं और अधिक जोखिम की स्थिति में हैं, वे ही क्वारंटीन में जा सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक एलएनजेपी के 80-100 डॉक्टर वर्तमान में क्वारंटीन में हैं और इस नए आदेश से अधर में हैं. मिसाल के लिए, अस्पताल के एक सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर, जो आईसीयू में तैनात थे, का कहना है कि वे अपने खर्च पर किसी और होटल में शिफ्ट हो जाएंगे.

नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने कहा, ‘मेरे घर में छोटा बच्चा है, मैं अपने परिजनों को जोखिम ने नहीं डाल सकता. मैं आईसीयू में था, जहां कई कोविड मरीज भर्ती थे. घर जाने की बजाय हममें से कई कमरा किराये पर लेने या किसी और होटल में रहने की सोच रहे हैं.’

वहीं, अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सुरेश कुमार कहते हैं, ‘उनके लिए रहने की दो जगहें हैं- एक तो हॉस्टल और दूसरा होटल, जो दोनों ही अब तक उन्होंने खाली नहीं किए हैं… अगर वे होटल में रहना चाहते हैं तो उन्हें हॉस्टल छोड़ना होगा. हम उन्हें विकल्प दे रहे हैं, या तो वे घर पर अपना क्वारंटीन पूरा कर सकते हैं या चाहें तो काम पर वापस लौट सकते हैं.’

रेजीडेंट डॉक्टरों का कहना है कि वे इस बारे में एक्सटेंशन लेने के लिए अस्पताल प्रशासन से बात करेंगे. मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टरों एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. पर्व मित्तल कहते हैं, ‘हम गुरुवार को मेडिकल डायरेक्टर से मिलेंगे और उनसे इस समयसीमा को थोड़ा बढ़ाने के लिए कहेंगे, जिससे कि डॉक्टरों कोई फैसला ले सकें.’

इससे पहले राममनोहर लोहिया अस्पताल के होटल में रह रहे डॉक्टरों को भी अस्पताल द्वारा फौरन होटल खाली करने का आदेश दिया गया था और ऐसा न करने पर वेतन में कटौती की बात कही गयी थी. इस पर डाक्टरों ने आपत्ति जताई थी और फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टरों एसोसिएशन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को भी पत्र लिखा था.

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